Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi

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Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi-खूबसूरत भक्ति!!!

जिसका साथी भगवान हो जाये तो फिर कहना ही क्या?

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नमस्कार साथियों!

इम्पोर्टेंट ज्ञान के इस सीरीज में हम ज्ञान की बातें दिल से करते हैं। आज कुछ भक्ति की बातें कर लेते हैं।आज के लेख का विषय है भक्त शिरोमणि धन्ना जाट के बारे में। एक अद्भुत व्यक्तित्व। आप इस लेख के अंत तक जरूर पढ़ें मजा आएगा।  

गांव में भागवत कथा का आयोजन

एक बार की बात है! एक गांव में भागवत कथा कहने के लिए एक पंडित जी को आमंत्रित किया गया। एक सप्ताह तक कथा चली। जब कथा की समाप्ति हुई तो पंडित जी बहुत सारा दान दक्षिणा मिला। उन्होंने एक पोटली में उसको बांधकर घोड़े पर सवार होकर चल दिए।

पंडित जी और धन्ना जाट का मिलन  

जिस गांव में पंडित जी ने कथा कही उसी गांव में एक बहुत ही सीधा साधा और गरीब किसान था। इस भोले भाले किसान का नाम था-धन्ना जाट। देखना क्या था जैसे ही पंडित जी घोड़े पर सवार हुए किसान ने आनन फानन में आकर पंडित जी के पैर पकड़ लिया। वो किसान बोला की अरे पंडित जी आप कहाँ चल दिए बिना मेरा बेडा पार किये।

आपने तो कहा था की जो ठाकुर महाराज की सेवा करता है तो ठाकुर जी उसका बेडा पार कर देते हैं। आप तो अब जा रहे हैं न ही मेरे पास ठाकुर जी हैं और न में यह जानता हूँ की कैसे उनकी पूजा की जाती है? अतः आप मुझे ठाकुर जी को देकर ही यहाँ से जाएँ। (Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

पंडित जी ने धन्ना को दिया “ठाकुर जी”

अब क्या होना था? पंडित जी बड़े असमंजस में पड़ गए। उनको तो जल्दी पड़ी थी घर जाने की। उन्होंने कहा की ठाकुर जी तुम्ही ले आओ। धन्ना बोले की मैंने तो कभी ठाकुर जी को कहीं देखा ही नहीं तो लाऊंगा कैसे? पंडित जी को अपने घर जाने की जल्दी थी उन्होंने सोंचा की कैसे इससे पिंड छुड़ाएं। उन्होंने अपनी पोटली खोली और भंग घोटने वाला सिलबट्टा पकड़ा दिए और बोले की ये लो यही हैं ठाकुर जी। आज से इन्हीं की पूजा अर्चना करना और प्रसाद चढ़ाना। (Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

ठाकुर जी की पूजा विधि पंडित जी ने बताया  

अब धन्ना जाट थोडा खुश हुए और फिर पंडित जी को बोले की आपने ठाकुर जी तो दे दिया अब इनकी सेवा और पूजा कैसे करें ये भी तो बताई देयो! पंडित जी बोले अरे भाई आप नाहा धोकर अपने ठाकुर जी को नहलाना और फिर भोग चढ़ाना। यह कहकर आनन फानन वाले पंडित जी चल दिए घोड़े पर सवार होकर। 

धन्ना ने शुरू किया ठाकुर जी की पूजा 

अब धन्ना फुले नहीं समा रहा था। निहायत सीधा साधा धन्ना चल दिया झूमते हुए अपने घर। सुबह तड़के उठकर जल्दी से नित्य कर्म करने के बाद पंडित जी के कहे अनुसार सिलबट्टे रूपी ठाकुर जी को अच्छे से नहलाया और उनको एक अच्छे जगह अपने घर में स्थापित कर पूजा पाठ के लिए तैयार कर दिया।

चूँकि धन्ना बहुत ही गरीब था। और विधवा माँ का गरीब बेटा था। उसके पास भोग लगाने नाम पर कोई पंडित जी की तरह बढ़िया सामग्री नहीं थी। अतः उसने जो नित्य भोजन करता था उसी हिस्से के रूप में बाजरे की रोटी और मिर्च की चटनी ही भोग लगाया। (Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

ठाकुर जी से धन्ना की हठ

अब चूँकि धन्ना ने भी अभी भोजन नहीं किया था तो उसने भी ठाकुर जी से कह दिया की अब तुम्हारी बारी है अब तुम भोग लगाओ तो मैं खाऊंगा।जब ठाकुर जी धन्ना जाट के लिए भोग नहीं लगाया तो देर बाद धन्ना बोल उठा….”पंडित जी तो ठहरे धनवान व्यक्ति वो नियमित तुम्हारे लिए खीर पूड़ी और मोहन भोग का प्रसाद चढ़ाते हैं और मैं एक गरीब किसान हूँ मेरे पास तो यही बाजरे की रोटी और हरी मिर्च की चटनी है।

आपको यही खाना पड़ेगा। खीर पूड़ी मेरे बस का नहीं है। फिर भी कुछ ठाकुर जी ने नहीं सुना और नहीं धन्ना के लिए भोग ही लगाया। बेचारा धन्ना भूखा ही रह गया। (Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

ऐसे ही सिलसिला चलने लगा धन्ना रोज बाजरे की रोटी और हरी मिर्च की चटनी का भोग लगा कर ठाकुर जी से हठ करने लगा। लेकिन ठाकुर जी की दया उसके ऊपर नहीं हो रही थी। जब छः दिन बीत गए तो धन्ना फिर बोल उठा अरे ठाकुर जी न आप खाते हो और नहीं मेरे लिए भोग लगाते हो। इस गरीब का भोग खाने में तुमको शर्म आ रही है क्या। तो फिर लो मैं अपनी आंखे बंद ही कर लेता हूँ। 

लेकिन ठाकुर जी कहाँ सुनने वाले कोई उत्तर नहीं पाकर सातवें दिन भूखा प्यासा धन्ना अपनी जट बुद्धि पर उतर ही आया और खूब फुट फुट कर रोने लगा और रोते बिलखते कहने लगा की मैंने तो सुना था की आप गरीबों की सुनते हो उनपर दया करते हो लेकिन मैं गलत था। ठीक आपको नहीं खाना मत खाओ लेकिन मैं भी अब जिन्दा नहीं रहूँगा। अब नहीं मुझे जीना है। (Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

ठाकुर जी प्रगट हुए

इतने पर धन्ना ने सिलबट्टा लिया और अपना सर फोड़ने पर उतारू हो गया। इतने में ही उस सिलबट्टे से एक बहुत ही तेज प्रकाश पुँज प्रगट हुआ और गरीब धन्ना का हाथ पकड़ कर कहा “ले देख धन्ना मैं तेरा यह भोग खा रहा हूँ और फिर बड़े आनंद के साथ ठाकुर जी बाजरे की रोटी और हरी मिर्च की चटनी खाने लगे। 

जैसे ही आधा बाजरे की रोटी ठाकुर जी खाये तब तक धन्ना बोल उठा क्या ठाकुर जी अकेले अकेल ही मेरा सारा बाजरे का रोटी खा लोगे तो मैं क्या खाऊंगा मैं भी कई दिनों से भूखा प्यासा हूँ। लेकिन आनंद में डूबे हुए ठाकुर जी खूब मजे से बाजरे की रोटी और हरी मिर्च की चटनी खाने लगे। और बोले की ये बहुत ही अच्छी लग रही है तो दूसरा ले ले।

धन्ना बोला की प्रभु! घर में दो ही रोटी बनती है एक माँ खाती है और दूसरा मैं। अगर दूसरा खा जाऊंगा तो माँ भूखी रह जाएगी। ठाकुर जी बोले तो फिर तुम ज्यादा क्यों नहीं बनाते हो! धन्ना बोले अरे प्रभु! मेरे पास खेत एक ही है और वो  भी छोटा है और ऊपर से मैं अकेला हूँ। ठाकुर जी बोले  “और खेत लेकर जोत ले।” धन्ना बोले प्रभु! मेरे पास बैल ना हैं मैं तो स्वयं खेतों को जोतता हूँ। (Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

फिर ठाकुर जी बोले की बेटा तो “तो नौकर रख ले।” धन्ना थोड़ा अंकुशाय और कहा की प्रभु! आप तो गरीब की मजाक उड़ावत हउआ। हमरे पास नौकर रखे के हैसियत रहत त हम दोनों माँ बेटा दो वकत की रोटी बढ़िया से खा लेते। अब ठाकुर जी पिघल गए और बोले की बेटा अब तू चिंता मत कर आज से मैं तुम्हारी सहायता करूँगा। 

साथी बने ठाकुर जी धन्ना जाट के

ईश्वर की हो जिसपर दृष्टि की वृष्टि तो मान लो भाई की उसकी बदल ही जाय सृष्टि। भक्त के वश में है भगवान। हो गए ठाकुर जी धन्ना के साथी। धन्ना के लिए एक भाई। अब ठाकुर जी शुरू कर दिए धन्ना की सहायता करना । ठाकुर जी धन्ना के साथ खेतों में काम करना शुरू कर दिए। ठाकुर जी ने धन्ना को अच्छी खेती करने में मदद करने लगे और बढ़िया जमीन और बैलों की जोड़ी दिलवा दिए।

कुछ समय बाद घर में गाय आदि भी आ गयी। अब तो गरीब धन्ना का मकान भी पक्का हो गया। सवारी आदि के लिए घोडा आ गया। धन्ना के काया ही पलट गया।धन्ना के दिन और रात दोनों बदल गए। धन्ना एक बड़ा जमींदार बसकता न गया।( Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

ईश्वर किन किन रूपों में आकर आपकी सहायता करता है ये वही जान सकता है जो ईश्वर के करीब रहता है। सच में मेरे प्यारे भक्तों बस आप सबरी की तरह ईश्वर पर भरोसा करो देखना ईश्वर आपके आसपास ही है। आपके अंदर ही है। 

धन्ना के गाँव में पंडित जी की वापसी

बहुत दिनों बाद पंडित जी का आगमन हुआ फिर उसी गाँव में भागवत कथा कहने के लिए। जमींदार धन्ना भी पंडित जी के दर्शन के लिए गए। धन्ना जाकर पंडित जी को अपनी आपबीती बताये और कहे की पंडित जी आप जो ठाकुर जी को मुझे दिए थे वो तो छः दिन तक कुछ खाये पिए ही नहीं और मुझे भी भूखे रखे।सातवें दिन जब उनको भूख से नहीं रहा गया तो फिर वो प्रगट हुए और मुझ गरीब का भोजन ग्रहण किये और फिर मेरे साथी बन गए और मेरे साथ मेरे सारे कामों में हाथ बटाये।   (Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

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अब तो ठाकुर जी की कृपा और सहायता से मेरे पास अच्छा खासा धन इकठ्ठा हो गया है जिससे मैं आपके लिए कुछ दान दक्षिणा की व्यवश्था करूँगा। 

पंडितजी थोड़ा हकबकाए और सोंचे की ये मुर्ख व्यक्ति है। मैंने तो इसको दिया था भांग पीसने वाला सिलबट्टा। कहाँ से इसको इसमें ठाकुर जी मिल गए। अब पंडित जी को क्या मालूम कब किसके साथ ईश्वर अपनी  कृपाओं का बौछार किस रूप में कर दें। उदहारण आपके सामने है। जब पंडित ने गाँव वालों से पुछा तो उन्होंने तपाक से कह दिया की पंडित जी धन्ना के घर चमत्कार तो हुआ ही है साथ ही अब धन्ना गरीब नहीं रहा। अब धन्ना गरीब कहाँ रहा। वो जमींदार हो गया है।

अब पंडित जी भी बेचैन हो गए और धन्ना से बोले की कल जब तुम कथा सुनने आना तो अपने मित्र को लेकर आना।जो तुम्हारे साथ तुम्हारा हाथ बटाता है।

भोला भाला धन्ना घर गया और अपने मित्र से कहा की चलो कल मेरे साथ तुम भी भागवत कथा सुनने चलना। तुमको पंडित जी बुलाये हैं। उसके मित्र ठाकुर जी बोले की ना बाबा मैं नहीं जाऊंगा कोई कथा-वथा सुनने। धन्ना बोले की क्या पंडित जी को ही कहो तो तुमसे मिलने के लिए ले आऊं। मित्र ठाकुर जी बोले की ये सब करने की जरूरत नहीं है मैं उस पंडित की कथा नहीं सुनूंगा वो झूठ का कथा कहता है। झूठी कथा कहने वालों से मैं नहीं मिलता।        

मुझे तो सिर्फ सच्चे प्रेम वाले लोग ही पसंद हैं। जो मुझे सच्चे प्रेम से याद करता है मैं उसके वश में रहता हूँ और मैं भी उस भक्त को पसंद करता हूँ। झूठे पूजा पाठ करने वाले लोग मुझे पसंद नहीं है।

यही होता है साथियों! लोगों को लगता है की भगवान को कथा,प्रसाद ,पैसा आदि चढ़ा देने से वो खुश हो जाएंगे तो यह इंसान का सबसे बड़ा भ्रम है । आप किसी चीज पर एक बार विश्वास करके देखें । अपनी प्रार्थनाओं पर, अपनी पूजा पर, अपने ईश्वर पर, अपनी किस्मत पर, अपने मेहनत पर आप विश्वास करके तो देखिए आपका जीवन सँवर जाएगा । (Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

धन्ना भगत हमी लगों में से थे । इसके अलावा और भी भक्त हुए जैसे -सूरदास,कबीरदास,सोमनाथ,सबरी । ये लोग विश्वास और भक्ति से ईश्वर को प्रसन्न किए और पाए । लोगों ने इनके विश्वास को तोड़ने की भी कोशिश की लेकिन ये लोग अपने विश्वास से टस से मस नहीं हुए और ईश्वर भक्ति में लगे रहे । इसलिए हमें तमाम प्रपंचों में नहीं पड़ना चाहिए बल्कि अपने विश्वास को आगे बढ़ाना चाहिए । 

तो देखा मित्रों भगवान आपके वश में रहेंगे बशर्ते आप भोलेपन में सच्चे मन से पुकारो। कोई दिखावा उनको पसंद नहीं है।(Dhanna jatt bhagat ki katha in Hindi)

 


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